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नवग्रह मंत्र - जप विधि, फायदे और शांति उपाय

नवग्रह मंत्र की पूरी जानकारी - सूर्य से केतु तक वैदिक, तांत्रिक और बीज मंत्र, जप विधि, संख्या और लाभ। ग्रह दोष दूर करने का सबसे प्रभावी उपाय।

नवग्रह मंत्र - जप विधि, फायदे और शांति उपाय

Contents Overview

नवग्रह मंत्र क्या हैं और क्यों जरूरी हैं?

वैदिक ज्योतिष में नवग्रह (नौ ग्रह) मनुष्य के जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं। ये ग्रह हैं - सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। इनमें राहु-केतु छाया ग्रह हैं, लेकिन इनका प्रभाव वास्तविक ग्रहों से कम नहीं होता।

जब कुंडली में कोई ग्रह कमजोर या पीड़ित होता है, तो जीवन में स्वास्थ्य, धन, करियर, रिश्ते आदि में परेशानियां आती हैं। नवग्रह मंत्र जप इन ग्रहों को शांत करने और उनके शुभ फल प्राप्त करने का सबसे सरल, शक्तिशाली और प्राचीन उपाय है। नियमित जप से ग्रहों की कृपा मिलती है और जीवन सुगम हो जाता है।

नवग्रह मंत्र के तीन मुख्य प्रकार

ग्रह मंत्र तीन प्रकार के होते हैं:

  • वैदिक मंत्र: ऋग्वेद, यजुर्वेद आदि से लिए गए, बहुत शक्तिशाली।
  • तांत्रिक मंत्र: तंत्र शास्त्र से, सरल और शीघ्र फलदायी।
  • बीज मंत्र: ग्रहों के मूल बीज से बने, सबसे शक्तिशाली माने जाते हैं।

तीनों ही प्रभावशाली हैं, लेकिन शुरुआत करने वाले लोग तांत्रिक या बीज मंत्र से शुरू करें तो आसानी रहती है।

नवग्रह शांति मंत्र (सभी ग्रहों के लिए)

सभी ग्रहों की एक साथ शांति के लिए यह मंत्र बहुत प्रसिद्ध है:

ॐ ब्रह्मामुरारि त्रिपुरान्तकरी भानु: शशि भूमिसुतो बुधश्च ।
गुरुश्च शुक्र: शनि राहु केतव: सर्वे ग्रहा: शान्ति करा भवन्तु ॥

रोज सुबह-शाम 11 बार जप करने से सभी ग्रहों का अशुभ प्रभाव कम होता है।

सूर्य मंत्र: जप विधि और लाभ

सूर्य आत्मा, सम्मान, पिता और नेतृत्व का कारक है। कमजोर सूर्य से आत्मविश्वास की कमी, सरकारी बाधा, नेत्र रोग होते हैं।

  • बीज मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
  • तांत्रिक मंत्र: ॐ घृणि सूर्याय नमः
  • जप संख्या: न्यूनतम 7,000 (या रोज 108 बार)
  • दिन: रविवार
  • समय: सूर्योदय के समय

लाभ: आत्मविश्वास बढ़ता है, पद-प्रतिष्ठा मिलती है, पिता से संबंध सुधरते हैं।

चंद्र मंत्र: जप विधि और लाभ

चंद्रमा मन, माता और मानसिक शांति का कारक है। कमजोर चंद्र से मानसिक तनाव, माता का स्वास्थ्य प्रभावित होता है।

  • बीज मंत्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः
  • तांत्रिक मंत्र: ॐ सों सोमाय नमः
  • जप संख्या: 11,000
  • दिन: सोमवार

लाभ: मन शांत रहता है, एकाग्रता बढ़ती है, मां-बहन से सुख मिलता है।

मंगल मंत्र: जप विधि और लाभ

मंगल साहस, भाई, भूमि और रक्त का कारक है। कमजोर मंगल से दुर्घटना, कर्ज, भाई से क्लेश होता है।

  • बीज मंत्र: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
  • तांत्रिक मंत्र: ॐ अं अंगारकाय नमः
  • जप संख्या: 10,000
  • दिन: मंगलवार

लाभ: साहस बढ़ता है, कर्ज से मुक्ति मिलती है, संपत्ति के विवाद सुलझते हैं।

बुध मंत्र: जप विधि और लाभ

बुध बुद्धि, व्यापार, त्वचा और वाणी का कारक है।

  • बीज मंत्र: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
  • तांत्रिक मंत्र: ॐ बुं बुधाय नमः
  • जप संख्या: 9,000
  • दिन: बुधवार

लाभ: बुद्धि तेज होती है, व्यापार में लाभ, बोलने की कला बढ़ती है।

बृहस्पति (गुरु) मंत्र: जप विधि और लाभ

गुरु ज्ञान, संतान, धन और धर्म का कारक है।

  • बीज मंत्र: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
  • तांत्रिक मंत्र: ॐ बृं बृहस्पतये नमः
  • जप संख्या: 19,000
  • दिन: गुरुवार

लाभ: संतान प्राप्ति, ज्ञान में वृद्धि, विवाह में सफलता, धन लाभ।

शुक्र मंत्र: जप विधि और लाभ

शुक्र सुख, वैभव, वाहन और वैवाहिक जीवन का कारक है।

  • बीज मंत्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
  • तांत्रिक मंत्र: ॐ शुं शुक्राय नमः
  • जप संख्या: 16,000
  • दिन: शुक्रवार

लाभ: वैवाहिक सुख, विलासिता, सौंदर्य में वृद्धि, धन की कमी दूर होती है।

शनि मंत्र: जप विधि और लाभ

शनि कर्म, न्याय और दीर्घायु का कारक है।

  • बीज मंत्र: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
  • तांत्रिक मंत्र: ॐ शं शनैश्चराय नमः
  • जप संख्या: 23,000
  • दिन: शनिवार

लाभ: साढ़ेसाती-ढैय्या के कष्ट कम होते हैं, नौकरी-व्यापार में स्थिरता आती है।

राहु मंत्र: जप विधि और लाभ

राहु भ्रम, विदेश और अचानक घटनाओं का कारक है।

  • बीज मंत्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
  • तांत्रिक मंत्र: ॐ रां राहवे नमः
  • जप संख्या: 18,000
  • दिन: शनिवार या बुधवार

लाभ: मानसिक भ्रम दूर, अदालती मामले सुलझते हैं, विदेश यात्रा सफल होती है।

केतु मंत्र: जप विधि और लाभ

केतु मोक्ष, रहस्य और पैत्रिक संपत्ति का कारक है।

  • बीज मंत्र: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः
  • तांत्रिक मंत्र: ॐ कें केतवे नमः
  • जप संख्या: 17,000
  • दिन: मंगलवार या बुधवार

लाभ: आध्यात्मिक उन्नति, पैत्रिक विवाद सुलझते हैं, चर्म रोग में राहत।

मंत्र जप के सामान्य नियम और सावधानियां

  • स्नान कर शुद्ध, साफ वस्त्र पहनें।
  • पूर्व या उत्तर दिशा में मुंह करके बैठें।
  • रुद्राक्ष या स्फटिक की 108 मनकों वाली माला का उपयोग करें।
  • संकल्प लेकर ही जप शुरू करें।
  • जप के दौरान बात न करें, हिले-डुलें नहीं।
  • जप संख्या कभी कम न करें, बढ़ा सकते हैं।
  • ग्रह के रंग का आसन और वस्त्र पहनें तो अधिक लाभ।

निष्कर्ष: नियमित जप से जीवन में सकारात्मक बदलाव

नवग्रह मंत्र जप कोई जादू नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया है जो हमारे अवचेतन मन को सकारात्मक दिशा देती है। रोज कम से कम 108 बार किसी एक ग्रह का मंत्र जपें, 40 दिन में ही बदलाव महसूस होने लगेगा।

याद रखें - मंत्र जप के साथ-साथ अच्छे कर्म भी जरूरी हैं। ग्रह हमें दिशा दिखाते हैं, लेकिन चलना हमें ही है। नियमित जप से ग्रहों की कृपा अवश्य मिलती है और जीवन सुखमय हो जाता है।

नवग्रह मंत्र - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. नवग्रह मंत्र क्या हैं और इनका जप क्यों करना चाहिए?

उत्तर: नवग्रह मंत्र नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) के विशेष वैदिक, तांत्रिक और बीज मंत्र हैं। इनका जप करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं, दोष शांत होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है। यह जीवन में स्वास्थ्य, धन, सुख-शांति और सफलता लाने का सबसे सरल व प्रभावी उपाय है।

2. बीज मंत्र, तांत्रिक मंत्र और वैदिक मंत्र में क्या अंतर है?

उत्तर:

  • वैदिक मंत्र - वेदों से लिए गए लंबे मंत्र, बहुत शक्तिशाली लेकिन उच्चारण में कठिन।
  • तांत्रिक मंत्र - छोटे और सरल, जल्दी प्रभाव दिखाते हैं।
  • बीज मंत्र - ग्रहों के मूल ध्वनि-बीज से बने (जैसे ह्रां, श्रां, क्रां आदि), सबसे शक्तिशाली और सिद्ध माने जाते हैं।
शुरुआती लोगों को बीज या तांत्रिक मंत्र से शुरू करना बेहतर होता है।

3. मंत्र जप के लिए कौन-सी माला सबसे अच्छी होती है?

उत्तर: रुद्राक्ष की माला या स्फटिक (क्वार्ट्ज) की 108 मनकों वाली माला सबसे उत्तम मानी जाती है। प्रत्येक ग्रह के लिए अलग-अलग माला भी प्रयोग की जाती है, जैसे सूर्य के लिए तांबे की माला, गुरु के लिए हल्दी की माला आदि।

4. क्या महिलाएं भी नवग्रह मंत्र जप कर सकती हैं? मासिक धर्म के दौरान क्या करें?

उत्तर: हाँ, महिलाएं पूर्ण अधिकार से नवग्रह मंत्र जप कर सकती हैं। मासिक धर्म के दौरान मौन जप (मानसिक जप) या केवल "ॐ नमः शिवाय" जैसे शिव मंत्र कर सकती हैं। ग्रह मंत्रों का स्पर्श जप (माला से) उन दिनों में न करें तो बेहतर है।

5. एक दिन में कितने मंत्र जपने चाहिए? क्या कम जपने से भी फायदा होता है?

उत्तर: पूर्ण सिद्धि के लिए निर्धारित संख्या (जैसे सूर्य - 7000, शनि - 23000) करनी चाहिए, लेकिन रोजाना 108 बार या 1 माला जपने से भी बहुत लाभ होता है। नियमितता सबसे महत्वपूर्ण है। 40 दिन तक निरंतर जप करने से स्पष्ट परिणाम दिखने लगते हैं।

6. क्या बिना गुरु के नवग्रह मंत्र जपे जा सकते हैं?

उत्तर: हाँ, नवग्रह के बीज और तांत्रिक मंत्र बिना दीक्षा के भी जपे जा सकते हैं। ये सामान्य साधकों के लिए सुरक्षित हैं। लेकिन अगर कोई बहुत गंभीर ग्रह दोष है या राहु-केतु की महादशा चल रही है, तो किसी योग्य ज्योतिषी या गुरु से मार्गदर्शन लेना उत्तम रहता है।

7. सभी ग्रहों का मंत्र एक साथ जप सकते हैं या अलग-अलग करना चाहिए?

उत्तर: अगर कुंडली में कई ग्रह पीड़ित हैं तो रोज सुबह-शाम नवग्रह शांति मंत्र 11 बार जपें। इसके अलावा जिस ग्रह की महादशा/अंतर्दशा चल रही हो या जो सबसे कमजोर हो, केवल उसी एक ग्रह का मंत्र विशेष रूप से जपें। एक समय में 1-2 ग्रहों पर ही फोकस करें तो ज्यादा प्रभावी होता है।

8. मंत्र जप का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

उत्तर: ब्राह्म मुहूर्त (सुबह 4 से 6 बजे) सबसे उत्तम है। इसके अलावा सूर्योदय, सूर्यास्त या संबंधित ग्रह की होरा में जप करना विशेष फलदायी होता है। रात में 9 बजे के बाद राहु-केतु का मंत्र जपना अच्छा माना जाता है।

9. क्या लाउडस्पीकर या मोबाइल पर मंत्र सुनकर भी लाभ होता है?

उत्तर: सुनने से भी कुछ लाभ होता है, लेकिन स्वयं उच्चारण करके जप करने का प्रभाव सौ गुना अधिक होता है। सुनाने का प्रयोग सहायक उपाय के रूप में किया जा सकता है, मुख्य उपाय नहीं।

10. शनि, राहु, केतु के मंत्र जपते समय डर लगता है, क्या करें?

उत्तर: पहले 11 बार हनुमान चालीसा या ॐ नमः शिवाय जपें, फिर ग्रह मंत्र शुरू करें। शनि-राहु-केतु के मंत्र हमेशा दिन के समय या शाम से पहले ही जपें। रात में जप करने से बचें। शुरुआत में केवल 11 या 21 बार जपें, धीरे-धीरे बढ़ाएं।

Written by Vedaayan

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