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दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa) पूरा पाठ, सरल अर्थ और लाभ

दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa) का पूरा पाठ हिंदी अर्थ के साथ, माँ के प्रमुख रूप, रोज पढ़ने के लाभ और नवरात्रि पाठ विधि। जय माता दी!

दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa) पूरा पाठ, सरल अर्थ और लाभ

Contents Overview

दुर्गा चालीसा क्या है और इसका महत्व

दुर्गा चालीसा माँ दुर्गा की स्तुति में रचित एक अत्यंत लोकप्रिय 40 चौपाइयों का भक्ति काव्य है। यह गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा की शैली में लिखा गया है और लाखों भक्त इसे प्रतिदिन पढ़ते हैं।

इसका रचयिता अनुरागी कवि (या कुछ मान्यताओं में ब्रह्मलीन संत श्री देवीदास जी) माना जाता है। नवरात्रि, दुर्गा पूजा तथा मंगलवार-शुक्रवार को इसका पाठ विशेष फलदायी होता है।

यह चालीसा माँ के नवदुर्गा रूपों, दश महाविद्या रूपों और राक्षस संहार की कथाओं को बहुत सुंदर ढंग से समेटती है। सरल भाषा होने के कारण बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सभी इसे आसानी से याद कर लेते हैं।

दुर्गा चालीसा का पूर्ण पाठ (मूल चौपाइयाँ)

॥ दोहा ॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥

॥ चौपाई ॥

निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुंलोक में डंका बाजत॥
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ संतन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें। रिपू मुरख मौही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला॥
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं। तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥

दुर्गा चालीसा का सरल हिंदी अर्थ (लाइन दर लाइन)

यहाँ प्रत्येक चौपाई का बहुत सरल और स्पष्ट अर्थ दिया जा रहा है ताकि हर उम्र का भक्त आसानी से समझ सके:

  • नमो नमो दुर्गे सुख करनी... → हे माँ दुर्गा! आपको बार-बार नमस्कार, आप भक्तों को सुख देने वाली और दुख हरने वाली हैं।
  • निरंकार है ज्योति तुम्हारी... → आप निराकार हैं, आपकी ज्योति तीनों लोकों में फैली हुई है।
  • शशि ललाट मुख महाविशाला... → आपके माथे पर चंद्रमा सुशोभित है, मुख बहुत बड़ा और विशाल है, नेत्र लाल और भृकुटि भयंकर है।
  • रूप मातु को अधिक सुहावे... आपके रूप को देखकर भक्तों को अपार सुख मिलता है।
  • तुम संसार शक्ति लै कीना... → आपने ही संसार की समस्त शक्ति को उत्पन्न किया और अन्न-धन देकर पालन-पोषण किया।
  • अन्नपूर्णा हुई जग पाला... → आप अन्नपूर्णा बनकर जगत का पालन करती हैं, आप ही आदि सुंदरी बाल रूप में हैं।
  • धरयो रूप नरसिंह को अम्बा... → आपने नृसिंह अवतार लेकर खंभे को फाड़कर प्रकट हो प्रह्लाद जी की रक्षा की।
  • लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं... → आप लक्ष्मी रूप में श्री नारायण के साथ क्षीरसागर में निवास करती हैं।
  • हिंगलाज में तुम्हीं भवानी... → आप हिंगलाज, मातंगी, धूमावती, भुवनेश्वरी, बगला, भैरव, तारा, छिन्नमस्ता आदि सभी रूपों में विराजमान हैं।
  • शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे... → आपने शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज का संहार किया। महिषासुर के अत्याचार से पृथ्वी जब त्राहि-त्राहि कर उठी तब आपने कालिका रूप धारण कर उसे मार डाला।
  • प्रेम भक्ति से जो यश गावें... → जो भक्त प्रेम से आपका यश गाते हैं, उनके पास दुख-दारिद्र नहीं आता।
  • दुर्गा चालीसा जो कोई गावै... → जो भी इस चालीसा का पाठ करता है, उसे सभी सुख और परम पद (मोक्ष) की प्राप्ति होती है।

दुर्गा चालीसा में वर्णित माँ दुर्गा के दस प्रमुख रूप

क्रमरूप का नामविशेषता
1अन्नपूर्णाअन्न की देवी, भूखों को भोजन देती हैं
2गौरीशिव की अर्धांगिनी, शांति और पवित्रता की प्रतीक
3सरस्वतीज्ञान और बुद्धि प्रदान करने वाली
4लक्ष्मीधन-वैभव और समृद्धि की देवी
5कालिकामहिषासुर का संहार करने वाली भयंकर रूप
6भवानीहिंगलाज शक्ति पीठ में निवास करने वाली
7मातंगीदश महाविद्या में से एक
8धूमावतीविधवा रूप, कष्ट निवारिणी
9बगलाशत्रुओं का नाश करने वाली
10छिन्नमस्तास्वयं का मस्तक काटकर रक्त पीने वाली परम शक्ति

दुर्गा चालीसा रोज पढ़ने के चमत्कारिक लाभ

  • मन को शांति मिलती है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
  • घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • शत्रुओं और भय से रक्षा होती है।
  • आर्थिक तंगी दूर होती है, लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है।
  • परीक्षा या नौकरी के इंटरव्यू में सफलता मिलती है (सरस्वती कृपा)।
  • बीमारियों से शीघ्र मुक्ति मिलती है।
  • विवाह में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं।
  • संतान प्राप्ति और गृहक्लेश दूर करने में विशेष लाभ।
  • पितृ दोष, कालसर्प दोष जैसे ज्योतिषीय दोषों में कमी आती है।
  • अंत में मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

नवरात्रि में दुर्गा चालीसा पाठ की विशेष विधि

  • सुबह स्नान कर लाल या पीले वस्त्र पहनें।
  • माँ दुर्गा की प्रतिमा या फोटो के सामने घी का दीपक जलाएँ।
  • लाल फूल, कुमकुम, अर्पित करें।
  • सुबह-शाम दोनों समय 11 या 21 बार दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
  • नवरात्रि के नौ दिन एक निश्चित समय पर पाठ करें तो माँ शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
  • पाठ के बाद “ॐ दुं दुर्गायै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • अंत में माँ से अपनी मनोकामना कहें और प्रसाद वितरित करें।

दुर्गा चालीसा vs दुर्गा सप्तशती: तुलना

पहलूदुर्गा चालीसादुर्गा सप्तशती
लंबाई40 चौपाइयाँ (लगभग 5-7 मिनट)700 मंत्र (13 अध्याय, 2-3 घंटे)
भाषासरल अवधीसंस्कृत
उपयोगरोजाना पाठ, सभी कर सकते हैंखासकर नवरात्रि में चंडी पाठ/हवन
लाभतुरंत मानसिक शांतिबड़ी बाधाओं और शक्तिशाली संहार

श्री दुर्गा चालीसा – सामान्य प्रश्नोत्तर (FAQ)

1. दुर्गा चालीसा किसने लिखी है?

उत्तर: दुर्गा चालीसा की रचना ब्रह्मलीन संत श्री अनुरागी कवि या कुछ परंपराओं में देवीदास जी के नाम से जानी जाती है। अंतिम पंक्ति में “देवीदास शरण निज जानी” होने के कारण अधिकांश भक्त इन्हें ही रचयिता मानते हैं।

2. दुर्गा चालीसा रोज कितनी बार पढ़नी चाहिए?

उत्तर: सामान्य दिनों में 1 या 3 बार बार। विशेष मनोकामना, नवरात्रि या कष्ट निवारण के लिए 11, 21 या 108 बार रोज पढ़ने का विधान है। 40 दिन तक निरंतर 11 बार पाठ करने से बहुत बड़ी मनोकामना पूरी होती है।

3. मासिक धर्म के दौरान क्या दुर्गा चालीसा पढ़ सकते हैं?

उत्तर: हाँ, बिल्कुल पढ़ सकते हैं। दुर्गा चालीसा, मंत्र और स्तोत्रों का पाठ किसी भी स्थिति में में किया जा सकता है। केवल मूर्ति या पूजा सामग्री को छूने से परहेज करें, पाठ पर कोई रोक नहीं है।

4. दुर्गा चालीसा पढ़ने का सबसे शुभ दिन और समय कौन सा है?

उत्तर:मंगलवार, शुक्रवार, अष्टमी, नवमी और नवरात्रि के सभी दिन सबसे उत्तम हैं। समय की बात करें तो सुबह ब्रह्म मुहूर्त (4–6 बजे) या संध्या काल में पाठ करने से शीघ्र फल मिलता है।

5. क्या दुर्गा चालीसा से शत्रु नाश और मुकदमे में जीत मिल सकती है?

उत्तर: जी हाँ। चालीसा में बगलामुखी, काली और छिन्नमस्ता जैसे शत्रुनाशक रूपों का स्मरण है। मंगलवार या शनिवार को लाल आसन पर बैठकर 21 बार पाठ करने और “ॐ दुं दुर्गायै नमः” का जाप करने से शत्रु भय, कानूनी अड़चन और कर्ज से मुक्ति मिलती है।

6. बच्चों और विद्यार्थियों को दुर्गा चालीसा पढ़ने से क्या लाभ है?

उत्तर: माँ सरस्वती रूप का इसमें स्पष्ट उल्लेख है। नियमित पाठ से एकाग्रता, बुद्धि, स्मरण शक्ति बढ़ती है और परीक्षा में सफलता मिलती है। बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को 5–7 साल की उम्र से ही याद करवाते हैं।

7. क्या दुर्गा चालीसा मोबाइल या कंप्यूटर पर पढ़ने से भी फल मिलता है?

उत्तर: हाँ, मिलता है। भक्ति और श्रद्धा सबसे बड़ा नियम है। लेकिन स्नान कर शुद्ध होकर, फोन साइलेंट रखकर और माँ का ध्यान कर पढ़ें तो अधिक पुण्य मिलता है।

8. दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती में क्या अंतर है?

उत्तर:

  • दुर्गा चालीसा – 40 चौपाइयाँ, सरल हिंदी-अवधी, 5–7 मिनट, सभी कर सकते हैं
  • दुर्गा सप्तशती – 700 संस्कृत मंत्र, 13 अध्याय, 2–3 घंटे, विधि-विधान और यज्ञ के साथ पढ़ी जाती है

चालीसा रोजाना के लिए और सप्तशती बड़ी बाधा निवारण के लिए है।

9. दुर्गा चालीसा से संतान प्राप्ति होती है?

उत्तर: हाँ। बहुत से दंपत्ति नवरात्रि में 9 या 21 दिन तक सुबह-शाम घी का दीपक जला कर 11 बार पाठ करते हैं और संतान गोपाल मंत्र के साथ माँ से प्रार्थना करते हैं – लाखों भक्तों को संतान सुख प्राप्त हुआ है।

10. पाठ के बाद क्या करें?

उत्तर: पाठ समाप्त कर “जय माता दी” तीन बार बोलें, माथा टेकें, थोड़ा प्रसाद (लड्डू या बताशे) ग्रहण करें और किसी गरीब, कन्या या गाय को दान करें। इससे पाठ का फल कई गुना बढ़ जाता है।

Written by Vedaayan

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